अयोध्या में 8 मुस्लिमो ने हिन्दू धर्म में वापसी की

15 वर्ष पहले अपने हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लाम धर्म को अपनाने वाले दो गांव के लोगों ने फिर से हिंदू धर्म को अपना लिया है। इन लोगों ने 15 वर्ष पहले इस्लाम धर्म अपनाया था, लेकिन अब फिर से इन लोगों ने हिंदू धर्म अपना लिया है। पूरी विधि-विधान के साथ मंदिर में भगवान के समक्ष इन लोगों ने इस्लाम धर्म को छोड़ कर हिंदू धर्म अपनाया। जलालपुर के आंबेडकर नगर तहसील क्षेत्र के दो गांवों के आठ लोगों ने मुस्लिम धर्म को छोड़ कर हिंदू धर्म को फिर से अपना लिया है।क्षेत्र के रामपुर दुबे गांव की शबनम परिवर्तित नाम सरोजा पत्नी बैजनाथ, नजमा परिवर्तित नाम शीला, मोहम्मद सफी परिवर्तित नाम बैजनाथ पुत्र मजनू, अकबर आलम परिवर्तित नाम अमित पुत्र बैजनाथ तथा जलालपुर थाना क्षेत्र के सोहगुपुर की सबीना परिवर्तित नाम सुरजा पत्नी प्रदीप कुमार, सकीना परिवर्तित नाम सीमा पुत्री प्रेमचंद, शाहजहां परिवर्तित नाम दुलारी पत्नी छब्बूलाल ने रविवार को जलालपुर थाना क्षेत्र के शीतला मठिया मंदिर पर पूरे विधि विधान के साथ हिन्दू धर्म को अपनाया।

पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष, धर्म प्रचारक विश्व हिंदू परिषद के केशव प्रसाद श्रीवास्तव ने उक्त परिवारों को, जो 15 वर्ष पहले हिंदू धर्म को छोड़कर मुस्लिम धर्म अपना लिया था, उनको वैदिक रीति रिवाज के साथ नारियल, चुनरी, हनुमान चालीसा देकर घर वापसी कराई। साथ ही उनके उज्जवल भविष्य के लिए भगवान से प्रार्थन की। धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि उनपर किसी भी हिन्दू धर्म गुरु और हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए किसी भी तरह का कोई दबाब नई था। उन्होंने अपनी मर्जी, और अपनी सहमति से इस्लाम को छोड़ हिन्दू अपनाया है।

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योगी सरकार की भ्रष्टाचारमुक्त ऑनलाइन समायोजन प्रक्रिया पर बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने फ़ेरा पानी

सरकार की भ्रष्टाचारमुक्त ऑनलाइन समायोजन प्रक्रिया पर तकरीबन दो दर्जन बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने पानी फेर दिया। इन अफसरों ने ऑनलाइन समायोजन के लिए आवश्यक शिक्षकों का सैलरी डाटा अपलोड नहीं किया या त्रुटिपूर्ण सूचनाएं भेज दी जिसके कारण हारकर सरकार को ऑफलाइन समायोजन के राजी होना पड़ा। बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारी जिलों से शिक्षकों का सैलरी डाटा मांगते रह गए लेकिन बीएसए की मनमानी के आगे किसी की एक न चली। सूचना के अभाव में टल रही समायोजन व तबादले की प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए मंगलवार को ऑफलाइन समायोजन का आदेश जारी करना पड़ा। जिससे बेसिक शिक्षा अधिकारियों को मनमानी की छूट मिल गई है। जिन जिलों ने शिक्षकों का सैलरी डाटा नहीं दिया उनमें लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, गोरखपुर, मेरठ, बुलंदशहर, उन्नाव, हाथरस, भदोही, देवरिया, बस्ती, संत कबीरनगर, जालौन, बांदा, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, आजमगढ़, बलिया, शामली, बाराबंकी और संभल का नाम शामिल है। इनमें से कई बीएसए की कार्यप्रणाली विवादों में रही है। इलाहाबाद में 1446 शिक्षकों का समायोजन जिले के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में 1446 सरप्लस शिक्षकों का समायोजन होगा। प्राथमिक में 1324 और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 122 शिक्षकों को सरप्लस चिह्नित किया गया है। समायोजन के लिए 18 जुलाई तक का समय दिया गया है। हालांकि इतने कम समय में काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है।

एक्शन में उत्तर प्रदेश पुलिस : दाऊद इब्राहिम का साथी नजीबाबाद से गिरफ्तार ..


​उत्तर प्रदेश की पुलिस जो कभी आतंक से लड़ने के लिए सुस्त और कमजोर होने का आरोप झेल कर आलोचना का शिकार होती थी वो अचानक ही योगी सरकार के सत्ता में आते ही एक्शन में आ चुकी है .. सैफुल्लाह के खात्मे के साथ भारत में ISIS की जड़े खोजने और खोदने से ले कर आतंक को खत्म करने के लिए प्रितबद्ध हो चुकी UP ATS ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है जिसमे आतंक के आका दाऊद इब्राहिम के गुर्गे को जो 993 में मुंबई को लहू लुहान कर के भाग गया था .. इतने सालों बाद कई निर्दोषों का वो हत्यारा उत्तर प्रदेश की पुलिस के हत्थे चढा ..

मुंबई से भाग कर गुजरात गया फिर गुजरात से उत्तर प्रदेश आया ये दुर्दांत अपराधी यहाँ भी अपना गिरोह छिप कर संचालित कर रहा था . उत्तर प्रदेश को शायद तुष्टिकरण की राजनीति देखते हुए उसने अपने ठिकाने के रूप में चुना था . यहाँ सवाल ये भी है की उत्तर प्रदेश में उसको शरण देने वालों को क्या नहीं पता था की ये दाऊद नाम के भारत के दुश्मन का गुर्गा है .. जिस अपराधी को गुजरात तक की पुलिस सुराग लगा कर पकड़ने आ गयी क्या उसको छिपा रखने वालों को और उसके पड़ोसियों को ये बात पता नहीं थी की यह देश का दुश्मन और मासूमों का हत्यारा है ..

अखिलेश सरकार का एक और घोटाला : सांप पकड़ने के लिए खर्च किये 9 करोड़, सीधे अखिलेश के निगरानी में हुआ था बजट आवंटन !


उत्तर प्रदेश की योगी आदित्य नाथ सरकार पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के दिए गए कई ठेकों की “विस्तृत विशेष ऑडिट” (खाता-बही की जांच) कराएगी। इस ऑडिट के तहत, लागत बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने, ठेके देने में नियमों का उल्लंघन, जरूरी मंजूरी न लेने और एक पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ रुपये देने की जांच विशेष तौर पर की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की सरकार की तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में हुई कथित धांधली की शिकायतों के बाद ये फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार सरकारी ऑडिट में कुछ विशेष आरोपों की खास तौर पर जांच की जाएगी। मसलन, जनेश्वर मिश्रा पार्क परियोजना में 20-20 लाख रुपये की नावें खरीदना, 14 करोड़ रुपये घास लगाने और भूविकास पर और पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ खर्च करना।अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनेश्वर मिश्रा पार्क और जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेएनआईपीसी) के निर्माण में आई लागत, पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके के विस्तार के खर्च की “विस्तृत ऑडिट” के आदेश दे दिए हैं। इन तीनों परियोजनाओं का काम सीधे अखिलेश यादव की निगरानी में हुआ था। मुख्यमंत्री रहने के दौरान अखिलेश के पास हाउजिंग विभाग था जिसके तहत ये तीनों काम थे।मार्च 2017 में योगी आदित्य नाथ ने सीएम पद की शपथ ली। दो महीने बाद मई में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर अनिल गर्ग ने इन तीनों परियोजनाओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग कमेटियां बनाईं। हर कमेटी में लोक निर्माण विभाग के एक चीफ इंजीनियर, एक सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और दो एग्जिक्यूटिव इंजीनियर और अन्य सदस्य हैं। इन कमेटियों ने अपने रिपोर्ट में पिछले हफ्ते “विशेष ऑडिट” की अनुशंसा की थी।जांच अधिकारियों के अनुसार  जेपीएनआईसी को विकसित करने में 864 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी उसका काम अधूरा है। जनेश्वर मिश्रा पार्क में विकास कार्य पर 396 करोड़ रुपये खर्च किए गए। हुसैनाबाद विकास कार्य पर 265 करोड़ रुपये। सूत्रों के अनुसार इन तीनों परियोजनाओं के लिए मंजूर की गई प्रारंभिक बजट से ये खर्च करीब दोगुने हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अनिल गर्ग ने कमेटी की रिपोर्ट की अनुशंसा बताने से इनकार करते हुए इस बात की पुष्टि की कि जेपीएनआईसी और हुसैनाबाद हेरिटेज जोन प्रोजेक्ट का विशेष ऑडिट कराया जा रहा है।