अमेरिका से मिली तोपों का पोखरन में हुआ परीक्षण, चीनी सीमा पर होगी तैनात

भारत एवं अमेरिका ने बोफोर्स विवाद के साये से परे जाते हुए पिछले साल 145 एम 777 तोपों के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। भारतीय आर्मी ने पोखरन में इन अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों का परीक्षण किया है। इस परीक्षण के जरिए इन तोपों की  स्पीड, आवृत्ति और क्षमता का आकलन किया गया। आर्मी सूत्रों के मुताबिक, इन तोपों का परीक्षण सितंबर तक जारी रहेगा। 

1980 के दशक के मध्य में बोफोर्स घोटाले को लेकर छिड़े विवाद के बाद भारतीय सेना में लंबी दूरी की इन तोपों को शामिल करने को लेकर लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी। इन तोपों को अधिकतर चीन से लगने वाली सीमा पर तैनात किया जा सकता है।

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खुलासा : RTI में पूछा गया सवाल कि भारतीय फ़ौज ने अब तक कितनी सर्जिकल स्ट्राइक की है, जवाब सुन देश रह गया सन्न …

कांग्रेस के बड़बोले पन की पोल खुल गयी हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, राजीव शुक्ला, रणदीप सुरजेवाला और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के किये गए झूठे दावों की पोल एक RTI के जवाब ने सबके सामने खोल के रख दी हैं. दरअसल जब बीते साल मोदी सरकार के राज में भारतीय जवानो द्वारा पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की गयी थी, अपनी इस वीरता और पाकिस्तान को दिए गए मुँहतोड़ जवाब के लिए मोदी सरकार और भारतीय जवानो ने ना सिर्फ पूरे देशभर में वाहवाही लूटी थी बल्कि अमेरिका , रूस , इजरायल जैसे देशों की नजर में अपनी धाक भी जमा ली थी क्योंकि माना जाता था कि ऐसा करने का माद्दा केवल उनकी स्पेशल फोर्सेस में था ..

1. भारतीय सेना ने सितंबर, 2016 से पहले कितनी बार सर्जिकल स्ट्राइक की थी और उनमें से कितनी सफल रही थीं?

2. सितंबर, 2016 के बाद ऐसी कितनी सर्जिकल स्ट्राइक की गई और उनमें से कितनी स्ट्राइक सफल रही थीं ?

3. इन सर्जिकल स्ट्राइक में हमारे कितने जवान बलिदान हुए ? 

इन सभी सवालो के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने बताया की सितमबर 2016 में एक सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी. दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि उससे पहले कोई सर्जिकल स्ट्राइक होने का उनके पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. और इसमें कोई जवान बलिदान नहीं हुआ … पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ऐतिहासिक कदम उठाना कांग्रेस के ज़हन में कभी नहीं आया लेकिन वर्तमान सरकार को को नीचा कैसे दिखाया जाये इसके लिए वो दिन रात मौका ढूंढ़ना नहीं भूलती।अपनी सत्त्ता देश में वापिस लाने की भूख में कभी राहुल गांधी जबरदस्ती सहारनपुर जाते हैं. फिर चाहे इससे दंगा भड़के और दंगे में मासूम लोगो की जाने जाये, उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अमरनाथ यात्रा में शिवभक्तों की परवाह से ज्यादा दिगविजय सिंह को ये बात सता रही हैं कि किस तरह से वो मोदी सरकार को ज़लील करे। इन सभी सवालों के जवाब अचानक ही एक RTI में सबके आगे आ चुके हैं .

इसबार भारतीय फ़ौज ने चीन की छाती पर गाड़ा तम्बू .. 


यकीनन ये 1962 वाला भारत नहीं है जो पीछे हट जाए .. इस बार सत्ता और समाज बदल चुका है . अब ना ही वो सेना है और ना ही वो समाज .. इस बार चीन को सब बता देने को आतुर हैं की भारत को आँख दिखाना अपने आप में ही एक गुनाह है …. भारत की फ़ौज ने जो कार्य किया वो ना सिर्फ दुनिया में बढ़ते रुतबे का परीक बना है अपितु संसार में भारत की धाक भी जमा चुका है जिस पर चीन की घुड़कियाँ कोई असर नहीं कर पाई ..

ज्ञात हो की अपनी फ़ौज ने डोकालम इलाके में लम्बा वक्त बिताने का फैसला किया है . फ़ौज ने उस इलाके मे अपना बेस , अपना तम्बू लगा लिया है … चिल्लाते चीन की हर धमकी को उसी के अंदाज़ में प्रतिउत्तर देते हुए भारत की फ़ौज ने अपने इरादे साफ़ कर दिए की पीछे चीन को ही हटना होगा . भारत ने उस इलाके में अपने सैनिकों की संख्या भी बढ़ा ली है जिसे रॉयल भूटान आर्मी का भी पूरा समर्थन मिल रहा है … ये २२ वां दिन है जब डोकालम में भारत और चीन की फौजें आमने सामने हैं . ये स्थान एक ट्राई जंक्शन है जो भारत भूटान और चीन की सीमाओं का त्रिकोण सा बनाता है ..भारत की फ़ौज और भारत की सत्ता के इस आक्रामक अंदाज़ ने चीन के वहां सड़क बनाने के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया है .

सटीक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय फ़ौज के इस 10 हजार फीट ऊंचे स्थान पर शिविर बनाने से ये बात साफ़ हो चुकी है की भारत इस इलाके को छोड़ने वाला नहीं है . भारत का साफ़ कहना है की पहले वहां से चीन की फौजों को हटना होगा उसके बाद ही भारत की फ़ौज वहां से हटने पर विचार करेगी .. जानकारी ये भी है की सैनिकों को उन सभी जरूरत के सामान भेजे जा रहे हैं जो वहां लम्बे समय तक रहने के लिए जरूरी होते हैं

इस साल 6 महीने में 92 आतंकी ढेर, मोदी राज में मारे गए UPA कार्यकाल से ज्यादे आतंकी !

कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई का असर नजर आने लगा है। 2016 में इसी समयावधि में मारे गए आतंकियों का आंकड़ा 79 था। आतंक निरोधी कार्रवाई में इस साल मारे गए आतंकियों का आंकड़ा 2012 और 2013 के सालाना फिगर को भी पार कर गया है। उस वक्त कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सत्ता में थी। 

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 2012 में 72 जबकि 2013 में 67 आतंकी मारे गए थे। वहीं, एनडीए के कार्यकाल 2014 में यह आंकड़ा उछलकर 110 पहुंच गया। 2015 में कुल 108 जबकि 2016 में 150 आतंकी मारे गए। गृह मंत्रालय के एक सीनियर अफसर ने बताया, ‘इस साल 2 जुलाई तक मारे गए आतंकियों की संख्या 2014 और 2015 में मारे गए आतंकियों के आंकड़े से जरा सा ही कम है।’ वह आतंकियों के खिलाफ इस कामयाबी का श्रेय सेना, केंद्रीय बलों, राज्य सरकारों और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को देते हैं।

अधिकारी यह बताना नहीं भूले कि इस साल 2 जुलाई तक मारे गए 92 आतंकियों में से अधिकतर बड़े आतंकी चेहरे थे। गृह मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ‘सुरक्षाबलों को घाटी में छिपे आतंकियों का पता लगाने और उनका सफाया करने के लिए फ्री हैंड दिया गया है। आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़ने से पहले लक्ष्य का पूरा नक्शा तैयार किया जाता है और यह तय किया जाता है कि कम से कम नुकसान में आतंकियों का खात्मा कैसे किया जाए।’

बता दें कि घाटी में आतंकियों के खात्मे में जहां इजाफा हुआ है, वहीं घुसपैठ की तादाद में कमी आई है। 2016 में घुसपैठ के कुल 371 केस दर्ज किए गए। वहीं, इस साल मई तक यह आंकड़ा घटकर 124 ही था। अधिकारी के मुताबिक, इन 124 कोशिशों में शामिल अधिकतर आतंकियों को ठिकाने लगा दिया गया। हालांकि, सुरक्षाबलों के लिए एक आंकड़ा चिंताजनक हो सकता है। घाटी में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में इजाफा हुआ है। इस साल 2 जुलाई तक आतंकवाद से जुड़ी 168 वारदात हुईं। इसी समयावधि में 2016 में यह आंकड़ा 126 था। जहां तक पथराव की घटनाओं का सवाल है, इस साल इनमें कमी आई है।