उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में लगाई गयी धारा 144 !


जिले में सावन के पहले सोमवार के मद्देनजर धारा 144 लागू कर दी गई है। इस आशय का आदेश जिले के अपर जिलाधिकारी बच्चालाल के आदेशानुसार यह निषेधाज्ञा 6 जुलाई को सबेरे 6 बजे से लेकर 10 जुलाई रात 12 बजे तक लागू रहेगी।

क्या है धारा-144 ?

सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है। इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करता है और जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते हैं। इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों के लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी जाती है।

क्या है सजा का प्रावधान ?

धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है। इस धारा का उल्लंघन करने वाले या पालन नहीं करने के आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है। वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है।

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मीरा कुमार ने की बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात

यूपीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार गुरुवार शाम पटना पहुंची है। पटना में उनके स्वागत के लिए बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी समेत कुछ नेता पटना एयरपोर्ट पहुंचे थ।

लेकिन मीरा कुमार के पटना पहुंचने से पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए अचानक दो के लिए राजगीर पहुंच गए है।

सूत्रों के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। इसलिए वो आराम करने के लिए राजगीर चले गए है।

बताया जाता है कि नीतीश कुमार को डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी थी। इसलिए नितीश ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और राजगीर चले गए है।

जानकारी के मुताबिक इसी कारण बिहार कैबिनेट की बैठक भी नहीं हो पाई है।

हालांकि कुछ जानकार बता रहे है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जारी राजनीतिक उठापठक के बीच नीतीश कुमार ने ये कदम उठाया है।

आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को अपना समर्थ दिया है।

इसके बाद लालू यादव और कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी पार्टियों ने नीतीश पर निशाना साधा था। लालू यादव ने तो नीतीश के इस फैसले को ऐतेहासिक भूल तक करार दे दिया था।

इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार बिहार में विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार से नहीं मिलेंगे।

इस साल 6 महीने में 92 आतंकी ढेर, मोदी राज में मारे गए UPA कार्यकाल से ज्यादे आतंकी !

कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई का असर नजर आने लगा है। 2016 में इसी समयावधि में मारे गए आतंकियों का आंकड़ा 79 था। आतंक निरोधी कार्रवाई में इस साल मारे गए आतंकियों का आंकड़ा 2012 और 2013 के सालाना फिगर को भी पार कर गया है। उस वक्त कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सत्ता में थी। 

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 2012 में 72 जबकि 2013 में 67 आतंकी मारे गए थे। वहीं, एनडीए के कार्यकाल 2014 में यह आंकड़ा उछलकर 110 पहुंच गया। 2015 में कुल 108 जबकि 2016 में 150 आतंकी मारे गए। गृह मंत्रालय के एक सीनियर अफसर ने बताया, ‘इस साल 2 जुलाई तक मारे गए आतंकियों की संख्या 2014 और 2015 में मारे गए आतंकियों के आंकड़े से जरा सा ही कम है।’ वह आतंकियों के खिलाफ इस कामयाबी का श्रेय सेना, केंद्रीय बलों, राज्य सरकारों और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को देते हैं।

अधिकारी यह बताना नहीं भूले कि इस साल 2 जुलाई तक मारे गए 92 आतंकियों में से अधिकतर बड़े आतंकी चेहरे थे। गृह मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ‘सुरक्षाबलों को घाटी में छिपे आतंकियों का पता लगाने और उनका सफाया करने के लिए फ्री हैंड दिया गया है। आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़ने से पहले लक्ष्य का पूरा नक्शा तैयार किया जाता है और यह तय किया जाता है कि कम से कम नुकसान में आतंकियों का खात्मा कैसे किया जाए।’

बता दें कि घाटी में आतंकियों के खात्मे में जहां इजाफा हुआ है, वहीं घुसपैठ की तादाद में कमी आई है। 2016 में घुसपैठ के कुल 371 केस दर्ज किए गए। वहीं, इस साल मई तक यह आंकड़ा घटकर 124 ही था। अधिकारी के मुताबिक, इन 124 कोशिशों में शामिल अधिकतर आतंकियों को ठिकाने लगा दिया गया। हालांकि, सुरक्षाबलों के लिए एक आंकड़ा चिंताजनक हो सकता है। घाटी में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में इजाफा हुआ है। इस साल 2 जुलाई तक आतंकवाद से जुड़ी 168 वारदात हुईं। इसी समयावधि में 2016 में यह आंकड़ा 126 था। जहां तक पथराव की घटनाओं का सवाल है, इस साल इनमें कमी आई है।

अखिलेश सरकार का एक और घोटाला : सांप पकड़ने के लिए खर्च किये 9 करोड़, सीधे अखिलेश के निगरानी में हुआ था बजट आवंटन !


उत्तर प्रदेश की योगी आदित्य नाथ सरकार पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के दिए गए कई ठेकों की “विस्तृत विशेष ऑडिट” (खाता-बही की जांच) कराएगी। इस ऑडिट के तहत, लागत बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने, ठेके देने में नियमों का उल्लंघन, जरूरी मंजूरी न लेने और एक पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ रुपये देने की जांच विशेष तौर पर की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की सरकार की तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में हुई कथित धांधली की शिकायतों के बाद ये फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार सरकारी ऑडिट में कुछ विशेष आरोपों की खास तौर पर जांच की जाएगी। मसलन, जनेश्वर मिश्रा पार्क परियोजना में 20-20 लाख रुपये की नावें खरीदना, 14 करोड़ रुपये घास लगाने और भूविकास पर और पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ खर्च करना।अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनेश्वर मिश्रा पार्क और जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेएनआईपीसी) के निर्माण में आई लागत, पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके के विस्तार के खर्च की “विस्तृत ऑडिट” के आदेश दे दिए हैं। इन तीनों परियोजनाओं का काम सीधे अखिलेश यादव की निगरानी में हुआ था। मुख्यमंत्री रहने के दौरान अखिलेश के पास हाउजिंग विभाग था जिसके तहत ये तीनों काम थे।मार्च 2017 में योगी आदित्य नाथ ने सीएम पद की शपथ ली। दो महीने बाद मई में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर अनिल गर्ग ने इन तीनों परियोजनाओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग कमेटियां बनाईं। हर कमेटी में लोक निर्माण विभाग के एक चीफ इंजीनियर, एक सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और दो एग्जिक्यूटिव इंजीनियर और अन्य सदस्य हैं। इन कमेटियों ने अपने रिपोर्ट में पिछले हफ्ते “विशेष ऑडिट” की अनुशंसा की थी।जांच अधिकारियों के अनुसार  जेपीएनआईसी को विकसित करने में 864 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी उसका काम अधूरा है। जनेश्वर मिश्रा पार्क में विकास कार्य पर 396 करोड़ रुपये खर्च किए गए। हुसैनाबाद विकास कार्य पर 265 करोड़ रुपये। सूत्रों के अनुसार इन तीनों परियोजनाओं के लिए मंजूर की गई प्रारंभिक बजट से ये खर्च करीब दोगुने हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अनिल गर्ग ने कमेटी की रिपोर्ट की अनुशंसा बताने से इनकार करते हुए इस बात की पुष्टि की कि जेपीएनआईसी और हुसैनाबाद हेरिटेज जोन प्रोजेक्ट का विशेष ऑडिट कराया जा रहा है।

अजित डोभाल के करीबी को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाने की तैयारी में मोदी सरकार !

जम्‍मू कश्‍मीर पर बेहद आक्रामक रूख अपनाने के पूरे मूड में आ चुकी केंद्र सरकार ने अब वहां के राज्यपाल के रिटायर होने के बाद नए राज्यपाल के तौर पर श्री राजीव महर्षि की नियुकित का प्लान बना रही है . अशांत कश्मीर को शांत करने के लिए हर हथकंडे अपना रही केंद्र सरकार ने इस बार जो राज्‍यपाल नियुक करने का मन बनाया है वो भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व् जेम्स बांड माने जाने वाले श्री अजीत डोभाल जी के काफी करीबियो में से माने जाते हैं और अपनी सख्त शासकीय छवि के लिए प्रसिद्द हैं … कश्मीर की वर्तमान स्थित को सुधारने में उनका अहम योगदान हो सकता है .यह नयी नियुक्ति वर्तमान राज्यपाल एन एन वोहरा के नजदीक समय में आ रहे रिटायरमेंट के बाद लगभग अवश्यम्भावी है . श्री महर्षि कश्‍मीर के हालातों पर बिना उस पद के ही नजर बनाए हुए हैं . उनकी सख्त फैसले लेने की छवि के चलते ही नरेंद्र मोदी सरकार की पहली पसंद के रूप में उन्हें देखा जा रहा है . आतंकी बुरहान वाणी के एनकाऊंटर के बाद कश्मीर के हालत सामान्य करने के लिए जितनी भी उच्चस्तरीय मीटिंग हुयी है उसमे लगभग सब में श्री राजीव महर्षि जी मौजूद थे और उनके कई सुझावों पर विचार के सुखद परिणाम भी आये हैं …

केजरीवाल को झटका : EC ने आप के 21 विधायकों की याचिका खारिज की

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के लाभ का पद से जुड़े मामले को खत्म करने की याचिका को चुनाव आयोग ने ठुकरा दिया है। आयोग का कहना है कि यह केस चलता रहेगा। गौरतलब है कि आप विधायकों ने याचिका दी थी कि जब दिल्ली हाईकोर्ट में संसदीय सचिव की नियुक्ति ही रद्द कर दी गई है तो चुनाव आयोग में इस केस के चलने का क्या मतलब है। मालूम हो कि पिछले साल 8 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द कर दी थी।चुनाव आयोग के अनुसार आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के पास संसदीय सचिव का पद 13 मार्च 2015 से लेकर 8 सितंबर 2016 तक था। इसीलिए अब इन विधायकों पर केस चलेगा। हालांकि अब इन विधायकों की संख्या घटकर 20 हो गई है क्योंकि राजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह ने जनवरी 2017 में पंजाब चुनाव लड़ने के‌ लिए विधायक पद से ‌इस्तीफा दे दिया था।
Via AmarUjala